वाह क्या कहने इस अध्बुद इंसान को जिसने धरती पर उत्पन हर जीव में सर्वोच्च स्थान पाया है ,ईश्वर ने बहुत सोच कर इस इंसान को विवध गुढ़ प्रधान किये कि वो इस धरती पर आकर उसका सदुपयोग करेगा ,सभ कि भलाई सोचेगा मानव कि बुधी का सही उपयोग करेगा मानव जाती को प्यार और सद्गुरो से भरपूर कर देगा ,पर अफ़सोस इंसान केवल अपनी भलाई और सुख सुविधा में मशगूल हो गया ,उसे औरो कि कोही फिक्र न हुई कि इस धरती पर असंख्य अन्य भी बहुत प्रार्ही है जिन्हें वो सुख हासिल नहीं है जो उसको है. अत उसे उनका ख्याल रखना चाहिए अन्यथा यह जीवन व्यर्थ गुज़र जायेगा और यह धन दौलत यूहि धरती पर रह जाएगी या सरकार इसको ले लेगी उस ख़ुशी कि कोही भी सीमा नहीं है जो हमें दुसरे के सुख को देख कर होती है हो बेहिसाब है, हो अनगिनित है , आओ क्यों नहीं हम सब इस ख़ुशी में शरीक होवे ,क्यों नहीं इस रस्ते पे चले जिसमे खुशिया ही खुशिया हो और गम का कोही लम्हा न हो और इंसान होने का पूरा हक़ हमको मिले और ईश्वर कि तरफ से हमें फूल ही फूल मिले कांटो कि कोही जगह ही न बचे आओ आज ही अभी से ही हम अपने जीवन में यह उतार लेवे कि अब हमें यही करना है यही करना है .