Tuesday, July 6, 2010

बरसात

आखिर जिसका का बहुत इंतजार था वोह आ गई और बहुत बहुत मज़ा दे गई और अब रोज़ आएगी इसी तरह रात को भी और सुबह को भी और हम सब को मस्त कर जाएगी और हम ही नहीं पूरी धरती को बहार दे जाएगी जिसका वोह काफी वक़्त से इंतजार कर रहे थे हां वोह हर साल आती है पर इस बार वोह देर से आई चलो बहुत बहुत धयवाद उस परवरदिगार का जिसने यह नियामत बक्षी अब सबका चेहरे खिले हुए है सब फुले समां रहे है कियो कि अब फसल कि अछि बुहाई होगी जो हम सब के लिए वरदान होगी सबसे अधिक किसान का चेहरा खिला हुआ है जिसकी मेहनत अब रंग लाएगी काश यह ख़ुशी हमेशा इन के चेहरे पर दिखे ताकि और लोग भी इस धंधे मैं अपनी रोज़ी रोटी को प्राप्त करे। औरो को भी भर पेट अन्न दे सके.

Monday, July 5, 2010

खुशिया

आहा कैसी सुहानी सुबह है चारो और हरयाली और हरयाली छाही हुई है भीनी भीनी खुशबू से पूरा माहोल चहक उठा है बरसात कि छिनी छिनी फुहारे अभी भी हवा के साथ मिल कर ठंडक कि लहर पल पल छ रही है इससे अब ये विश्वास हो गया कि रात भर बरसात ने मौसम को शुश्ग्वर बना दिया है वाह री कुदरत वाह तुम्हे लाख लाख शुकराना कि आखिर तुम्हे इस धरती का खियाल आया । अब आपसे विनीति है कि इस महोल को पुरे तीन महीने बनाये रखना ताकि इस धरती में अन्दर पानी पहुच जावे । कितना अच्छा लगता है यह सब देख कर कि चारो और खुशियों कि बहार और बहार नज़र आती है .खुशिया और खुशिया यही तो हर इन्सान चाहता है जिंदगी भर नहीं तो जीवन का किया मतलब इसके बगेर वीरानी और वीरानी ही है और खुशिया आती है प्यार से और अब वो प्यार नहीं रहा इंसानों मैं इसकी जगह ले ली है पैसो ने सिर्फ पैसा यानि रुपैया और वोह भी सदा रहने वाला नहीं फिर कियो पैसे से इतना प्यार और प्यार जो अपने आप मैं बहुत शक्ति रखता है जो अद्भुत होता है जो अमर है जिसे कोही छीन नहीं सकता है झो खुशियों से लबरेज है उसे कियो नहीं प्राप्त किया जावे जिससे सभी दुःख दूर हो जाते है और खुशियाँ चारो और सिमट जाति है पैसो को केवल जरुरत समज कर इस्तेमाल किया जावे और उतना ही कमाया जावे जितनी जरुरत होवे तो यह संसार आपसे मिल जायेगा ख़ुशी दो और ख़ुशी लो .

Sunday, July 4, 2010

dio

sua chiare che dio sono ogni dove nel mondo,ma abbiamo al circa nel mondo che dove sia lui per questo ho spendo nostro vita ,posso essere non vede volta. come vita sia andando sul .oggi una cosa ho disposto che questo tutto mondo sono bella nel ogni sito ma solo un uomo devono circa esso presto.

दुनिया

आज मैं सुबह से ही बहुत सोच रहा हू कि इश्वर ने कितनी अच्छी यह दुनिया बनाई aगर अछे मन से इसे देखे तो चारो और से मन प्रफुलत हो उठता है । चिर्र्यो का चहचहाना इधर उधर फुदकना ,कोयल कि कु कु कानो को झंकार कर देती है । और अगर बरसात का मौसम हो तो रिमझिम फुहारे गिर रही हो तो और हाथ मैं चाय का प्याला हो तो मौसम को और रंगीन बना देता है कियो कि मकान वैसे ही नंदी के किनारे बसा हुआ है ऐसा लगता है कि स्वर्ग यही है इससे भर कर कुछ नहीं है बस फिर भगवान को धन्यवाद करने का बार बार जी करता है कि कितनी अच्छी यह दुनिया बनाई इन्सान के लिए जहाँ सब कुछ हो देखने सुनने खाने एवम सभी कुछ । वाह रे मालिक वाह तुम्हे कोटि कोटि प्रर्रहम पर मालिक तुमने सभी इन्सान अछे कियो नहीं बनाये ?