Tuesday, July 6, 2010

बरसात

आखिर जिसका का बहुत इंतजार था वोह आ गई और बहुत बहुत मज़ा दे गई और अब रोज़ आएगी इसी तरह रात को भी और सुबह को भी और हम सब को मस्त कर जाएगी और हम ही नहीं पूरी धरती को बहार दे जाएगी जिसका वोह काफी वक़्त से इंतजार कर रहे थे हां वोह हर साल आती है पर इस बार वोह देर से आई चलो बहुत बहुत धयवाद उस परवरदिगार का जिसने यह नियामत बक्षी अब सबका चेहरे खिले हुए है सब फुले समां रहे है कियो कि अब फसल कि अछि बुहाई होगी जो हम सब के लिए वरदान होगी सबसे अधिक किसान का चेहरा खिला हुआ है जिसकी मेहनत अब रंग लाएगी काश यह ख़ुशी हमेशा इन के चेहरे पर दिखे ताकि और लोग भी इस धंधे मैं अपनी रोज़ी रोटी को प्राप्त करे। औरो को भी भर पेट अन्न दे सके.

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