Sunday, July 4, 2010
दुनिया
आज मैं सुबह से ही बहुत सोच रहा हू कि इश्वर ने कितनी अच्छी यह दुनिया बनाई aगर अछे मन से इसे देखे तो चारो और से मन प्रफुलत हो उठता है । चिर्र्यो का चहचहाना इधर उधर फुदकना ,कोयल कि कु कु कानो को झंकार कर देती है । और अगर बरसात का मौसम हो तो रिमझिम फुहारे गिर रही हो तो और हाथ मैं चाय का प्याला हो तो मौसम को और रंगीन बना देता है कियो कि मकान वैसे ही नंदी के किनारे बसा हुआ है ऐसा लगता है कि स्वर्ग यही है इससे भर कर कुछ नहीं है बस फिर भगवान को धन्यवाद करने का बार बार जी करता है कि कितनी अच्छी यह दुनिया बनाई इन्सान के लिए जहाँ सब कुछ हो देखने सुनने खाने एवम सभी कुछ । वाह रे मालिक वाह तुम्हे कोटि कोटि प्रर्रहम पर मालिक तुमने सभी इन्सान अछे कियो नहीं बनाये ?
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