Thursday, February 14, 2013

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक पुराणी पार्टी है जिसने देश की आज़ादी के लिए अहम् भूमिका   अदा की है इसे आम हिन्दुस्तानी कभी भी नहीं भुला सकता है ,खास कर वो जिन्होंने आज़ादी के पहले भारत में जनम लिया एम अनेक कष्ट सहे ,गुलामी का दर्द सहना अपने आप में बेमिसाल होता है ,वो भी अपने वतन में . वतन के लिए कुर्बान हुए शहीदों को शत शत  नमन .राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की अगुवाई में सभी भारतीयों ने एक झूट होकर आखिर 300 सालो बाद विदेशी हुकमरानो को इस प्यारे देश से भगा दिया जो अपने आप में बेमिसाल है यह लढ़ाई गाँधी जी ने अहिंसा से जीती ,जो शायद पुरे विशव में एक ही उदहारण है ,जिसे हमेशा याद किया जायेगा ,यह जिंदगी ईशवर की दें है ,किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि इसको मिटा दे ,या ख़तम कर दे ,महात्मा गाँधी इसी सिद्धान्त पर जिंदगी भर चले ,एम वो दर्ज़ा हासिल किया जिसपर कोही विरला ही पहुच सकता है ,उन्होंने भारतीय जनता का असीम प्यार और इज्ज़त प्राप्त किया जिनके वो अधिकारी थे ,परन्तु किसी सिरफरे ने आज़ादी के बाद भगवन के मंदिर में उन्हें हमेशा की नींद में सुला दिया .हालाँ कि गाँधी जी भारत का विच्छेद किसी भी हाल में नहीं चाहते थे परन्तु परीस्थ्तियो ने ऐसा माहोल बना की उन्होंने एम अन्य भारतीय नेताओ को यह मानना परा .गांधीजी चाहते थे की भारत आज़ाद हो गया अब कांग्रेस को यह दल भंग कर देना चाहिए ,परन्तु नेहरु जी व् अन्य नेताओ ने इन्हें अनसुनी कर दी ,आज़ादी के बाद नेहरु जी ने भारत को संभाला और प्रधान मंत्री का पद हासिल किया ,पटेल  को ग्रह मंत्री का पद मिला ,नेहरु जी के बाद इन्द्रा  जी ने यह पद हासिल किया और भारत को नए  उचाहियो तक ले गई ,जिसे भारत वासी कभी नहीं भूल पाएंगे ,इन्द्र जी से पहले शास्त्री जी ने भारत को 18 महीने संभाला और भारत -पाक युद्ध में पाक के छके छुराए ,परन्तु इन नेताओ के बाद भारत में कोही इतना सशक्त नेता नहीं आया जिन्हें भारतीय वो दर्ज़ा दे सके जो हमारे पुराने शासको ने प्राप्त किया था . और अब तो राजनीती एक दंदा  बन गया  है वो देशभक्ति  और कुर्बानी की भावना का लोप हो गया है .एक दल ही नहीं रह गया जिसे जनता सर्कार बनाने के लिए चुने ,कही दल मिल कर सर्कार बनाते है ,और सबके राग अलग अलग होते है ,एकता का आभाव  है ,संसद में कही भार नोक झोंक होती है ,जनता की आवाज़ सुनी नहीं जाती है चाहे कही दिन भूखे रह कर हरताल करे ,प्रदर्शन करे ,शांतिपूर्वक धरना दे ,यह कैसी सर्कार इस प्रजातान्त्रिक देश में ,यह सही है जनता के वोट से यह सरकार आती है ,लेकिन यह भी सही है हर सांसद अपने खेत्र से जनता की जरूरतों को पूरा करने में अपनी कमर कस  दे न की संसद में जावे ही नहीं या जाये तो प्रशन ही न पूछे न की अपने खेत्र की जरुरत संसद के पटल पर रखे ही नहीं ,भारत की जनता अब जागरूक है और संसद का भी अब सीधा प्रसारण होता है जिन्हें जनता देख रही होती है अपने सांसद को और पुरे घटनाक्रम को .