Tuesday, February 24, 2015
insaani fitrat rose sugandh: manav ke hatyare
rose sugandh: manav ke hatyare: दुनिया अजीबो गरीब है कब क्या हो कहाँ कुछ पत्ता नहीं चलता है कुदरत के नियम निराले है ,कही सुख परता है तो कही बाढ़ आती है ,कही भूकम्प तो कही ज...
navrangprakash: rajneeti
navrangprakash: rajneeti: भारत की राजनीती भी अजीब है शायद दुनिया में ऐसी हो कहने को तो यह सेवा है जनता के लिए भारत और देश के विकास के लिए परन्तु ऐसा बहुत कम है कुछ ह...
rajneeti
भारत की राजनीती भी अजीब है शायद दुनिया में ऐसी हो कहने को तो यह सेवा है जनता के लिए भारत और देश के विकास के लिए परन्तु ऐसा बहुत कम है कुछ ही लोग है जो वास्तव में अपना तन मन लूटा कर अपने आप को देश के प्रीति न्योछावर कर देते है और वो काम कर जाते है जिन्हे युगो युगो तक याद किया जाता है ,भारत की आज़ादी के लिए जीवन देने वालों की लिस्ट बहुत लम्भी है जिन्हे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता ,कितनी हैरानी की बात है उन्होंने तो अपना बलिदान दे कर देश को नहीं राह पर छोर गए आने वाले नए नौजवानो के लिए जो देश को नई दिशा देकर दुनिया में भारत का नाम रोशन करे।
अफ़सोस कुछ को छोढ़ कर बाकियो ने सिर्फ अपने आप को देखा और की या अपने चाहने वालों की ,देश की गरीब जनता पर ध्यान न दिया अमीर और अमीर होते गए ,गरीब ज्यो के त्यों।
और आज की राजनीती तो बिलकुल अलग है सत्ता में आते हो वो अपने आप को देश का बादशाह समझते है जो भी उनके दिमाग में आता है वो फैसला लेते है चाहे जनता पसंद करे या नहीं ,उन्हें फायदा हो या नहीं ,जब की जनता का शासन है और जनता ने उन्हें चुन कर सत्ता पर बिठाया की देश को सही दिशा में ले कर इतना भारत का का विकास करे की जनता को कोही असुविधा न हो ,यह सच है की भारत में पैसे की कमी नहीं है बशर्त ईमानदारी उसे खर्च खर्च किया जाये। जनता की मुलबुत सुविदाए भी आज सबको उपलभ्द नहीं है ,
अफ़सोस कुछ को छोढ़ कर बाकियो ने सिर्फ अपने आप को देखा और की या अपने चाहने वालों की ,देश की गरीब जनता पर ध्यान न दिया अमीर और अमीर होते गए ,गरीब ज्यो के त्यों।
और आज की राजनीती तो बिलकुल अलग है सत्ता में आते हो वो अपने आप को देश का बादशाह समझते है जो भी उनके दिमाग में आता है वो फैसला लेते है चाहे जनता पसंद करे या नहीं ,उन्हें फायदा हो या नहीं ,जब की जनता का शासन है और जनता ने उन्हें चुन कर सत्ता पर बिठाया की देश को सही दिशा में ले कर इतना भारत का का विकास करे की जनता को कोही असुविधा न हो ,यह सच है की भारत में पैसे की कमी नहीं है बशर्त ईमानदारी उसे खर्च खर्च किया जाये। जनता की मुलबुत सुविदाए भी आज सबको उपलभ्द नहीं है ,
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