Monday, June 6, 2011

rajneeti

कैसी राजनीती है भारत की ,हो सकता है पूरी दुनिया में ऐसी हो ,पैर तोबा इस राजनीती से ,कितनी अजीब सोच बन जाती है राजनितिक की ,पहले और बाद में दिन रात का अंतर हो जाता है ,सच तो यह है वो न दीन का रहता है न ही दुनिया का ,उसे अजीब सी चिंता हमेशा रहती है जो उसे पता नहीं कहा ले जाती है उसके दिल की न चलती है न दिमाग की और न ही उसे पता लगता है कि वो क्या कर रहा है ,अजीब सा नशा उसे दीन रात रहता है ,जिससे अगर वो अलग भी होना चाहे तो नहीं होता है ,लोगो  का हुजूम हमेशा उसके साथ रहता है उसकी परसनल लाइफ ख़तम हो जाती है ,क्या यह कोही जिन्दगो है ,इस पर भी अगर वो कुछ देश या व्यक्तियों का भला करे तो बात कुछ बन जाती है अन्यथा कुछ नहीं और जिंदगी कि शाम आ जाती है फिर वो कुछ करने लायक नहीं होता है और ख़तम .कहने को तो यह लाइफ जनता के लिए अर्पित मानता है पर ऐसा होता नहीं है ,वो सिर्फ वक्त का मोहरा बन कर रह जाता है ,इसलिए शायद वो रुपये जोरने में लग जाता है ,शायद अपने बुढ़ापे के लिए ,पर वक्त का क्या पता आगे होता है क्या ?