Saturday, June 11, 2016

member of parliament

भारत  की आज की राजनीती अजीब राह पर चल रही है जो राजनीतिक सिद्धांत थे उनकी पूर्ण बलि दे दी गई है चाहे नई किसी रचना के लिए चाहे सांसद और विधान सभा की कुर्सी के लिए उन लोगो को टिकेट दिया जाता है जो राजनीती के बारे में कुछ भी नहीं जानते क्यों की कलाकार  है या खिलाड़ी क्यों की उनकी जीत निश्चित लगती है न वो संसद में कुछ बोलते है न ही विधान सभा में।
बस जब पार्टी को उनके वोट की जरुरत  परती  है वो काम आते है  आखिर हम ऐसे लोगो को क्यों ससद में या विधान सभा में भेजते है जहाँ भारत की आम जनता के लिए कानून बनते है जहाँ जनता की किस्मत का फैसला होता है उनकी खुशहाली और जरूरतों का लेखा झोखा होता है जहाँ बात को सुन कर अपनी राय व्यक्त की जाती है जनता के हित का ध्यान रख जाता है और ये विचार सिर्फ वही रख सकता है जो जनता के बीच में रहता हो उनके दिख दर्द से वाकिफ हो न की दूर सिर्फ पैसा कमाता हो।
आज किसी भी दल के सदस्यः को बहुत ही कम अपनी पार्टी के विरोध में बोलते हुआ देखा जाता है  ऐसा क्यों आखिर ?क्या पार्टी ने उसको मना कर रख है या इनकी कोई सोच ही नहीं है। आज ऐसा लगता है पार्टी के चार या पांच वरिष्ठ सदस्य ही हर जगह बोलते है और सब सदस्य इसे स्वीकार कर लेते है। बाद में जब विरोध होता है  तब  पता लगता है की यह गलत डिसिशन था या मामला कोर्ट में चला जाता है।
आज जो काम कार्य पालिका का होना चाहिए उसे कोर्ट कर रहा है क्यों ? क्यों की कार्य पालिका  में समुचित सोच नहीं है आखिर जनता अदालत में जाती है वही उनकी सुनवाही होता है और उचित डिसिशन होता है जो जनता की हित  में होता है
भारत के लोकतंत्र की स्तम्भ है हमारी संसद  जहाँ भारत और भारत की जनता के भाग्य का फैसला होता है वहां एक बुद्धिमान और सुद्राः विचारों वाले व्यक्ति की पहुंच होनी चाहिए न की एक कलाकार की जो राजनीती और विचारों से बिलकुल अलग हो ,भारतीय दलों को यह सोच अवशय रखनी चाहिए