जिंदगी अजीब है कब क्या हो जाये पत्ता नहीं चलता मालिक ने हर व्यक्ति जीवन में हर चीज अलग है कोही कहता है व्यक्ति खुद अपनी लाइफ बनता है कई लोग कहते है म्हणत से व्यक्ति अपनी जिंदगी बनता है कई कहते है की हालत व्यक्ति की जिंदगी बनाने आवर बिगार्ने में अहम् होते है सब की अलग अलग सोच आवर विचार है परन्तु धार्मिक लोग हमेशा यही कहते है जो मालिक यानि सर्वशक्तिमान चाहे होगा उसने सब लिख रखा है जो टाइम तो टाइम चेंज होता रहता है कभी व्यक्ति खुश होता है कभी दुखी यह सब जान के व्यक्ति सोचता है आखिर वो म्हणत क्यों कर रहा है जो लिखा है वो तो होगा ही वक़्त के अनुसार फिर क्यों व्यक्ति इतना परेशां रहता है धार्मिक किताबो के अनुसार पिछले जनम के करम भी काम करते है आखिर इंसान क्या करे अजीब सी ोाहेली है यह जीवन कुल मिला कर व्यक्ति सिर्फ करम करने का अधिकारी है वो भी अच्छे आवर न किसी को दुखी करे न किसी को सताए आशा न रखे जो होगा अच्छा ही होगा ईश्वर पर हमेशा विश्वास रखे