सच शब्द अपने आप में बहुत ही माईने रखता है ,दो अख्शारो का बना हुआ शब्द व्यक्ति की जिंदगी बदल देता है ,व्यक्ति के आचार विचार सभी बदल जाते है ,इसका चलना ,बोलना उठाना ,बेठना सभी प्राय बदल जाते है ,यहाँ तक दोस्त और मिलने वाले भी ,सच अपने आप में असीम मतलब छुपाये हुए रहता है जीवन के प्रत्येक कार्य में सच का समावेश अपने आप हो जाता है और उस काम में चार चाँद लग जाते है और वो कार्य सफल होता है और उसकी खुशबू चारो और वातावरण को सुगंदित बना देती है यह व्यक्ति के जीवन में निखार ला देती है ,भारतीय धर्म शास्रो में इसका उलेख कही जगह दिया हुआ है ,की युधिस्टर का रथ ज़मीन से दो इंच उप्पेर चलता था केवल सच बोलने पर ,यह हकीक़त है सच की महिमा अपरम्पार है ,धार्मिक किताबो में यह भी लिखा हुआ है कि जो व्यक्ति लगातार ११ वर्ष हमेशा सत्य बोलेगा ,उसके बाद वो जो भी बोलेगा वो अवश्य ही सत्य होगा ,यानि उसके मुख से निकला शब्द ,भगवन के मुख से निकला हुआ मन जायेगा ,कितनी न विधि कि विडम्बना है .इस संसार में भी जो है वो सच है ,सच का ही बोलबाला है ,पहले भी सच था ,आज भी सच है और आगे भी सच ही रहेगा ,ईश्वर स्रुस्थी के रचनाकार है उसी कि बनाई दुनिया में सभी मानव ,जीव जंतु ,पक्षी जानवर ,पेढ़ पोधे यहाँ विराजमान है ,और सभी को अपना अपना कर्म करना है और फिर समाप्त ,इंसान को कुदरत का सर्श्रेथ प्राणी माना गया है क्यों कि इसको ही बुध्दी एम बोलने कि शक्ति ईश्वर ने प्रदान कि है ताकि उसका सदुपयोग कर अन्य प्ररियो को राहत पहुचाहे और जीवन चक्र को सफल बनाये ,न कि लढ़ाई और झगरे कर अपना और दूसरो का जीवन कष्टप्रद बनाये ,प्यार और शांति ही जीवन का आधार है इसी में व्यक्ति जी कर जीवन को उच्चिस्तर पर पंहुचा सकता है ,और वो पल और ख्हर किसी स्वर्ग से कम नहीं होते है ,यही जीवन है और यही जीवन का सार है ",जियो और जीने दो "
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