ऐसा लगता है जैसे कुछ रह गया है जिंदगी में
हर वक्त अजीब सी बेचेनी महसूस होती है
मन में अगिनित विचारो की बाढ़ सी लगी रहती है
क्यों और कहा से आते है कुछ महसूस नहीं होता
शायद बरसो से छिपी कल्पना अब साकार होने को बेक़रार है
पर क्यों और कैसे और कब कौन देगा इन प्रशनो के जवाब
क्या कोई देवता आने को है तेयार ,पर नहीं आता कोई ख्याल
अरे मै कौन भूल गया कि यह सपना नहीं यह तो कल्पना है
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