Wednesday, October 15, 2014

kudrat

सर्द मौसम की शरुआत हो गई है सुबह सुबह हलकी हलकी ठंडी हवा की लहरे बदन को चुंबन सी लगने लगी है साथ में फूलो की हलकी हलकी महक वातावरण को और खुशनुमा बना रही है ,प्रकृति की यह अनोखी शुरुआत अब अगले चार महीने रहेगी यह प्रकृति की धरती को शानदार सौगात है और इंसानो के लिए खूबसूरत नज़ारे चारो और बिखर जाते है कही बर्फ के पहाढ़  कही कल कल बहता हुआ शीतल जल ,कही बादलो को छूते हुए शरीर को अध्बुद ख्हरहः मन को और उल्हाहित कर देते है।
ईश्वर की यह अध्बुद लीला ईश्वर में विश्वास  बल देती है और सर स्वत ही झुक जाता है और मुँह से शब्द बाहर आ जाते है  "वाव  मालिक तेरी लीला अपरम्पार है "

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