जिंदगी इस दुनिया में अजीब नज़ारे दिखाती है जो इंसान के सोच से पड़े है किन्तु व्यक्ति को उसका मुकाबला करना पडता है यही जीवन का सार है चलना ही जिंदगी है फल चाहे जो आये पर जवाब तो देना ही परता है व्यक्ति को हमेशा सकारत सोचना पडता है
ईश्वर ने यह सृष्टि पता नहीं क्या सोच कर बनाई है हम इन के गुण दोष में नहीं जा सकते क्यों की उसकी लीला अपरम्पार है ,जो कुछ वो हर व्यक्ति के लिए करता है यह उसकी सोच और निर्णय है उसमे किसी का न दखल चलता है न सोच वो हर क्रिया कलाप का मालिक है कही बार व्यक्ति को उसकी सोच और क्रिया पर गुस्सा आता है वो भगवान् से नाराज़ भी होता है परन्तु बाद में उसे यह महसूस होता है की ईश्वर ने जो कुछ किया अच्छा ही किया।
यह बिलकुल सच है व्यक्ति के क्रिया कलप पर उसकी पूर्ण नज़र रहती है की व्यक्ति क्या अच्छा कर रहा है क्या बुरा उसकी दृष्टि से कोई भी ओझल नहीं रहता
इस सर्वशक्तिमान ईश्वर की कोटि कोटि नमन।
ईश्वर ने यह सृष्टि पता नहीं क्या सोच कर बनाई है हम इन के गुण दोष में नहीं जा सकते क्यों की उसकी लीला अपरम्पार है ,जो कुछ वो हर व्यक्ति के लिए करता है यह उसकी सोच और निर्णय है उसमे किसी का न दखल चलता है न सोच वो हर क्रिया कलाप का मालिक है कही बार व्यक्ति को उसकी सोच और क्रिया पर गुस्सा आता है वो भगवान् से नाराज़ भी होता है परन्तु बाद में उसे यह महसूस होता है की ईश्वर ने जो कुछ किया अच्छा ही किया।
यह बिलकुल सच है व्यक्ति के क्रिया कलप पर उसकी पूर्ण नज़र रहती है की व्यक्ति क्या अच्छा कर रहा है क्या बुरा उसकी दृष्टि से कोई भी ओझल नहीं रहता
इस सर्वशक्तिमान ईश्वर की कोटि कोटि नमन।
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